پزمان روی تو بودم اندر بهار پار 
تو نآمدی به یاد تو آزرده شد دلم 
خاک مرا ز مهر تو بنیاد کرده اند 
از سوز بی بقای تو عمریست غافلم 
امید من از خانه خود می شود برون 
روزی که درد و داغها از سینه ها گذشت 
چندین بهار در گذشت ای وای صد دریغ 
عمرم به سوز و حسرت تو بی وفا گذشت 
من می روم ز دامن شبرنگ زندگی 
فریاد تو به گوش من از دوری های دور
مهر خموشی بر لب و سوزت به سینه ام 
نالان ز کرده ها و پشیمانم از غرور 
صدبرگ راز های من در کشته های عمر 
نشکفته از خزان دلم ماند از نمو
با یاد واپسین تو و آه و حسرتت 
خاموش گشت هر دو دبار ترانگی 

ملکه عوض اوا 

ЁДИ ВОПАСИН!

Пазмони руи ту будам андар бахори пор, 
Ту н-омади ба ёди ту озурда шуд дилам. 
Хоки маро зи мехри ту бунёд кардаанд, 
Аз сузи бебакои ту умрест гофилам.
Умеди ман аз хонаи худ мешавад бурун, 
Рузе ки дарду догхо аз синахо гузашт. 
Чандин бахор даргузашт, э вой сад дарег, 
Умрам ба сузу хасрати ту бевафо гузашт.
Ман меравам зи домани шабранги зиндаги, Фарёди ту ба гуши ман аз дурихои дур. 
Мухри хамуши бар лабу сузат ба синаам, 
Нолон зи кардахову пушаймонам аз гурур.
Садбарги розхои ман дар киштахои умр, Нашкуфта аз хазони дилам монд аз нуму. 
Бо ёди вопасини туву оху хасратат, 
Хомуш гашт харду дабори ...таронагу
 
 
  

 

 


Saturday, 13 June 2026
شنبه, ۲۳ خرداد ۱۴۰۵
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فرازی از گات ها: هات 31 بند 22 - ای اهورا مزدا ! شخص خردمند و هوشیار و کسی که با منش خویش حقیقت را درک می کند از قانون ایزدی آگاه است و با نیروی معنوی از راستی و پاکی پشتیبانی کرده و گفتار و کردار خود را جز به راستی نخواهد آراست و در راه گسترش راستی گام برخواهد داشت ؛ چنین شخصی نسبت به تو ای مزدا وفادار و شایسته ترین یار و مدد کار مردم به شمار خواهد رفت.