در اين روزها براي ايران عزيز مي خواهم بگويم (شهريه احتم زاد بانوي غزل تاجيكستان)

چون بارگاه نور خدا مي پرستمت
ايران ، اي قلمرو پيغمبران راز
جز آيت محبت تو نيست شعر من
بر جانماز مهر تو مي آورم نماز
بشكسته اي تو گردن شيطان به مشت دل
ايران ، اي قلمرو پاك فرشته ها
سوي تو تا سجود نآرم، وجود من
از سرنوشت خويش نخواند نوشته ها
از دور من زيارت خاك تو كنم
از دور من به مرقد حافظ برم سلام
خونين دلم چو لعل بدخشان به ياد تو
ايران ، اي قلمرو احسان و احترام
سوي تو بركشم ز دل آواي زندگي
لب تشنه ام چو ريشه خود سوي زنده رود
ايران ، اي قلمروي جاويد و ايزدي
تا زنده ام فرستمت از قلب خود درود ، درود ، درود

Дар ин рузхо барои Эрони азиз мехохам бигуям.

Чун боргохи нури Худо мепарасатамат,
Эрон, аё каламрави пайгамбарони роз.
Чуз ояти мухаббати ту нест шеъри ман,
Бар чонамози мехри ту меоварам намоз.
Бишкастаи ту гардани шайтон ба мушти дил,
Эрон, аё каламрави поки фариштахо.
Суи то сучуд наорам, вучуди ман,
Аз сарнавишти хеш нахонад навиштахо.
Аз дур ман зиёрати хоки ту мекунам,
Аз дур ман ба маркади Хофиз барам салом.
Хуниндилам чу лаъли Бадахшон ба ёди ту,
Эрон, аё каламрави эхсону эхтиром..
Суи ту баркашам зи дил овои зиндаги
Лабташнаам чу решаи худ суи Зиндаруд.
Эрон, аё каламрави човиду эзади,
То зиндаам фиристамат аз калби худ дуруд,дуруд,дуруд....

Шахрия Ахтамзод


Saturday, 13 June 2026
شنبه, ۲۳ خرداد ۱۴۰۵
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فرازی از گات ها: هات 28 بند 4 - به یاد سپرده ام که روانم را با اندیشه نیک همراه سازم چه از پاداش مزدااهورا از برای هر کردار آگاهم. تا مرا تاب و توان است کوشش خواهم کرد تا مردم را بیاموزم که به راستی گرایند و درستی پیشه سازند. ( برگردان : موبد فیروز آذرگشسب.;